हाइपरट्रॉफिक और केलॉइड निशान क्या है जानिए इसके घरेलू उपचार


हाइपरट्रॉफिक और केलॉइड निशान क्या है जानिए इसके घरेलू उपचार
hypertrophic scars (commons.wikimedia.org)


केलॉइड और हैपेरट्रोफिक इन हिंदी अक्सर कई लोगों में चोट के या किसी अन्य कारण से निशान (स्कार्स) रह जाते है और समय के साथ चले भी जाते है लेकिन कुछ में यह नहीं जाते बल्कि बड़े हो जाते है साथ ही देखने में भी अच्छे नहीं लगते है यह किसी भी आकार, रंग के हो सकते है कई लोगों में यह जानने में यह परेशानी होती है कि यह  हाइपरट्रॉफिक स्कार्स है या केलॉइड।  आईये इसके बारे में जानते है -


हैपेरट्रोफिक और केलॉइड में अंतर - difference between hypertrophic scars and keloid scars in hindi


स्कार्स (निशान) दो प्रकार के होते है हाइपरट्रॉफिक और केलॉइड निशान।  दोनों देखने में तो निशान या स्कार ही है  लेकिन दोनों में ही आकार और उभार में काफी अंतर है।


 हाइपरट्रॉफिक स्कार्स सामान्यतः  लाल, कम उभार और अधिक फैले नहीं होते है तथा कुछ ही हफ्तों में यह सपाट, पीले और हल्के होने लगते है। यह चोट के लगने के क्षेत्र तक ही सिमित रहता है।


यह कई फाइब्रो ब्लास्टिक कोशिकाओ और छोटे कोलेजन फाइबर के संगठन से बनते है और एक सीमा(बाउंडरी) के भीतर रहते है। जब घाव भरने के दौरान आस पास बहुत अधिक खिचाव या तनाव होता है तो स्किन पहले जैसी लचीली नहीं रहती है।  ये केलॉइड की तरह घाव के आगे नहीं बढ़ते है। यह शुरू में लाल रंग के होते है लेकिन बाद में इनका रंग हल्का होने लगता है।



हाइपरट्रॉफिक और केलॉइड निशान क्या है जानिए इसके घरेलू उपचार
 केलॉइड निशान (commons.wikimedia.org)


  इसके  विपरीत केलॉइड निशान आपके घाव से भी बड़े होकर फैलने लगते है और खुद से छोटे नहीं होते है। ये चोट लगने के काफी साल बाद भी आ सकते है। जहां केलॉइड निकलता है वहां का हिस्सा ऊपर की तरफ उठ जाता है। डार्क स्किन वाले केलॉइड स्कार का अधिक निर्माण करते है। यह छाती, पीठ, कान, हाथ कही भी हो सकते है।


केलॉइड का निर्माण कैसे होता है 

अनियंत्रित (उनकंट्रोलड) मोटे व बड़े कोलेजन फाइबर होते है जो कई तंतुओं के साथ  संगठित रहते है।  ये हल्के लाल रंग के हो सकते है और इनमे खुजली होती है।  जब कोई चोट या जख्म होता है और वह ठीक होने लगता है तो स्किन की कोशिकाएं और संयोजी ऊतक (फाइब्रो ब्लास्टिक) डबल काम करना शुरू कर देती है जिससे जख्म ठीक होने के बाद भी यह क्रिया चलती रहती है और स्किन मोटा उभरा हुआ नजर आने लगता है।


केलॉइड होने का कारण - reasons of keloid in hindi

आवश्यक टैटू न बनवायेस्किन में पिम्पल वगैरा होने से बचाये, यदि निकलते है तो उनका शीघ्र उपचार करें।कान, नाक या किसी जगह पर छिद्र करवाने सेजल जाने परकिसी कीड़े के काटने पर.



केलॉइड का इलाज - treatment of keloid scar in hindi


 तेल 

इसका उपयोग ऊतक को नरम करने के लिए किया जाता है ताकि खिंचाव कम हो लेकिन इससे केलॉइड पूरी तरह खत्म नहीं है। डॉक्टरी सलाह पर लें।

सर्जरी -

 इसमें केलॉइड स्कार्स को पूरी तरह निकाल तो दिया जाता है पर यह फिर से आ सकते है।



कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन

इसे 4 से 7 हफ्तों में एक बार केलॉइड  ऊतकों में लगाया जाता है जिससे उभार को कम किया जा सके।  यह प्रक्रिया दर्द देती है।


लेजर विधि

इस विधि को सुरक्षित और असरदार माना गया है।


केलॉइड का इलाज कौन नहीं करा सकता है


  • जिन्हे कोई पुरानी गंभीर बीमारी जिसका उचार अभी तक न किया गया हो वे न कराये
  • प्रेग्नेंट महिलाएं
  • बच्चे

उपचार के बाद त्वचा कैसी दिखेगी


केलॉइड के उपचार के बाद स्किन  रंग हल्का लाल दिख सकता है, साथ ही सनटैनिंगम , त्वचा की रंग में दूसरी त्वचा से अलग रंग दिख सकता है, जलन भी हो सकती है।

केलॉइड ठीक होने  वाला समय

इसे ठीक होने में तकरीबन 7 से 8 सप्ताह लग सकता है।


घरेलू उपचार - home remedies for keloid scars in hindi

कुछ घरेलू नुस्खे और उपचार दिए गए है जिन्हे चिकित्सक के सलाह पर आप कर सकते है -

सिलिकॉन शीट 

यह शीट लगाने से उभरे हुए निशान को सिकोड़ने में मदद मिलती है।  आपको यह ऑनलाइन मिल सकती है।

प्याज़ का रस 

प्याज़ को पीस कर इसके रस को केलॉइड पर लगाए।  इसके अच्छे परिणाम मिल सकते है।

सेब का सिरका 

 एक चम्मच सेब के सिरके में इसके बराबर ही एक चम्मच पानी मिलाये और केलॉइड निशान पर लगाए आधे घंटे बाद धोये। दिन में 3 बार कर सकते है।

नींबू 

 नींबू वैसे भी डार्क स्पॉट को और रंगत निखारने के काम आता है।  इसके जूस को स्कार्स पर कुछ हफ्ते तक 20 मिनट के लिए लगाए इससे स्कार्स का रंग हल्का होने में मदद मिलेगी।

एलो वेरा जेल 

 यह एंटी बैक्टीरियल होता है और स्किन हील करता है इसे सीधा स्कार्स पर लगाए और आधे घंटे लगे रहने के बाद गुनगुने या सादे नार्मल पानी से धोएं।  इसे दिन में दो बार आराम से सकते है।

चन्दन 

 चन्दन के साथ गुलाब जल को मिलाकर पेस्ट बनाये और केलॉइड और हाइपरट्रॉफिक निशान पर लगाए।  इसे रात को करे और सुबह धो लें।

बेकिंग सोडा और हायड्रोजन पेरोक्साइड 

आधा चम्मच बेकिंग सोडा और दो चम्मच  हायड्रोजन पेरोक्साइड को मिलाकर पेस्ट बनाये और प्रभावित जगह पर 25 मिनट लगाए।  फिर सादे पानी से धो लीजिये।  लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।